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माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला अब कंपनी के चेयरमैन...

/Public Reporter
Posted : Fri/Jun 18, 2021, 10:23 AM - IST

नई दिल्ली / माइक्रोसॉफ्ट ने अपने भारतवंशी सीईओ सत्य नडेला को कंपनी का अध्यक्ष बनाया है, जिस अतिरिक्त भूमिका में वह ''बोर्ड का एजेंडा निर्धारित करने में अगुवाई करेंगे। माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प ने बुधवार को घोषणा की कि बोर्ड के स्वतंत्र निदेशकों ने सर्वसम्मति से नडेला को बोर्ड के अध्यक्ष की भूमिका के लिए...

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By  Public Reporter
posted : Mon/Apr 12, 2021, 11:16 AM - IST

New Delhi / Vaccination Becomes... / दिल्ली/ भारत दुनिया में सबसे तेज टिकाकरण करने वाले देशों की सूची में अमेरिका को पछाड़ कर शीर्ष पर आ गया है। कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान के 85वें शनिवार को भारत ने यह मुकाम हासिल किया।इतने टिकाकरण करने में अमेरिका को 89 और चीन को 102 दिन लगे थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश मे हररोज लगाए जाने वाले टीकों के मामले में भी भारत शीर्ष पर बना हुआ है। भारत मे प्रतिदिन 38,93,288 टीके लगाए जा रहे है। वहीं दूसरे नंबर पर अमेरिका जहां वैक्सिन की रोजाना औसतन 30 करोड़ डोज दी जा रही है। मंत्रालय ने बताया कि अमेरिका में 85वें दिनो में 9.2 लोगो को कोरोना का टीका लगाया गया। जबकि इतने ही दिनों में चीन ने 6.14 करोड़ और ब्रिटेन में 2.13 करोड़ वैक्सीन की डोज लाभार्थियों को थी गई थी। भारत में हो रहा सबसे तेज टिकाकरण पंतप्रधान कार्यक्रम ने एक चार्ट ट्वीट किया। भारत को सबसे तेज गति से 10 करोड़ टिका लगाने वाले देश के रूप में दिखाई गया है। साथ ही कहा गया कि यह भारत को स्वस्थ और कोरोना मुक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को मजबूत कर रहा है। पीएम मोदी ने कि टिका महोत्सव मनाने की अपील बीते दिनों पंतप्रधान नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियो के साथ बैठक में देशवासियों 11-14 अप्रेल के बीच मे टिका उत्सव मनाने की अपील की है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 11 अप्रेल को महात्मा ज्योतिबा फुले जी के जन्मजयंती पर और 14 अप्रेल को डॉ बाबा साहेब की जयंती पर इस बीच सभी टिका उत्सव मनाये। पीएम मोदी ने कहा था कि हमारी कोशिश होनी चाहिए इस टिका उत्सव में हम ज़्यादा से ज़्यादा लोगो का टिकाकरण किया जा सके।



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By  Public Reporter
posted : Wed/Feb 10, 2021, 10:17 AM - IST

Wardha / हिंदी विवि के मुख्य... / महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ के डीन एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्‍यक्ष प्रोफेसर कृपाशंकर चौबे को विश्‍वविद्यालय का मुख्‍य राजभाषा अधिकारी बनाया गया है। साथ ही वे विश्‍वविद्यालय में कई अन्‍य विभागों के प्रभारी अध्‍यक्ष एवं कई बड़े दायित्‍वों का निर्वहन भी कर रहे हैं। प्रोफेसर चौबे इससे पूर्व लंबे समय तक जनसत्‍ता जैसे प्रतिष्ठित समाचारपत्र में अपनी सेवाएं दी हैं। देश के राष्‍ट्रीय एवं अंतरराष्‍टीय समाचरपत्रों में एक खास विचारधारा के लिए लेखन का कार्य करते रहते हैं। प्रोफेसर चौबे समाजसेवी महाश्‍वेता देवी के दत्‍तक पुत्र के रूप में भी जाने जाते हैं। भारत की पूर्व रेल मंत्री ममता बनर्जी के समय में रेल मंत्रालय में हिंदी सलाहकार समिति के सदस्‍य के रूप में भी प्रोफेसर चौबे अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इनकी महत्‍वपूर्ण रचनाओं में महाश्‍वेता देवी का जीवन और साहित्‍य, महाअरण्य की माँ, मृणाल सेन का छायालोक, करुणामूर्ति मदर टेरेसा और नजरबंद तसलीमा प्रमुख कृतियां हैं।



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By  Public Reporter
posted : Wed/Feb 03, 2021, 04:28 AM - IST

Samba / जम्मू केन्द्रीय... / नेपाल गणराज्य की प्रतिष्ठित एजेंसी NCHDC  द्वारा अकादमिक लेखन के लिए दिए जाने वाला वार्षिक सम्मान Academic Excellence Award 2020 की घोषणा हुई। 13 सितंबर 2020 को काठमांडू में आयोजित सम्मान समारोह में कोविड-19 की वजह से डॉ बाबू शामिल नहीं हो सकें। संस्था ने Certificate of Appreciation का अवार्ड डाक सेवा से उनके पते पर भेज दिया। ज्ञात हो कि यह सम्मान मुख्यतः उच्च शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, प्रवासन, संस्कृति जैसे विषयों पर मौलिक एवं शोध लेखन के लिय दिए जाते हैं। डॉ. बच्चा बाबू  वर्तमान में जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया स्टडीज़ विभाग में वरिष्ठ सहायक प्रोफ़ेसर पद पर कार्यरत हैं। साथ ही विश्वविद्यालय की कई अन्य प्रशासनिक ज़िम्मेदारी जैसे प्रभारी कुलानुशासक, निदेशक सेंटर फ़ॉर योग एवं मीडिया अधिकारी का दायित्‍व भी संभाल रहे हैं। इन्‍होंने जम्मू कश्मीर से जुड़े कई विषयों पर मेजर एवं माइनर प्रोजेक्ट भी किया है। डॉ. बाबू को अकादमिक एक्सिलेंस अवार्ड 2020 मिलने पर विश्‍वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों में खुशी की लहर है।



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By  Public Reporter
posted : Wed/Feb 03, 2021, 02:16 AM - IST

Mothīhāri / महात्मा गांधी... / महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के नव गठित आचार्य भरत मुनि संचार शोध केंद्र में मीडिया अध्ययन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. साकेत रमण को सह समन्वयक बनाया गया है। विश्वविद्यालय के ओएसडी डॉ. पदमाकर मिश्रा द्वारा इस बाबत पत्र जारी किया गया है। कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि अभी तक विश्वविद्यालय में कुल 11 शोध केंद्र स्थापित किए गए हैं और आचार्य भरत मुनि के नाम पर स्थापित केंद्र स्वयं ही अपनी विशिष्टता सिद्ध करेगा। कुलपति ने शोध केंद्र के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार समेत समन्वयक व सह समन्वयक को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। यह शोध केंद्र मीडिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार के मार्गदर्शन में कार्य करेगा। भारतीय प्राचीन संचार व्यवस्था के संवर्धन को लेकर इस शोध केंद्र की रूपरेखा एवं प्रस्ताव डॉ. रमण ने दिया था। डॉ. रमण ने बताया कि शोध केंद्र द्वारा दो शोधार्थियों को पीएचडी कराया जाएगा व भारतीय प्राचीन संचार संबंधी लघु शोध कार्य के लिए फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी। साथ ही केंद्र विविध फंडिंग एजेंसीज से प्राप्त प्रोजेक्ट पर भी शीघ्र ही कार्य प्रारंभ करेगा। इसका प्रस्ताव तैयार किया का रहा है। शोध केंद्र ईस्टर्न कम्युनिकेशन फिलॉस्फी पर रिसर्च जर्नल भी प्रकाशित करने की योजना पर कार्य कर रहा है। वरिष्ठ संचार शास्त्री डॉ. रमण मुजफ्फरपुर जिले के निवासी हैं। भारतीय प्राचीन संचार पर उनकी पुस्तक भारतीय संचार दर्शन एक नई दृष्टि 2016 में प्रकाशित हो चुकी है। इस विषय पर डॉ. रमण के करीब 10 शोध पत्र राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित हो चुके हैं। वर्ष 2020 में डॉ. रमण के निर्देशन में कठोपनिषद के संचार सिद्धांत पर असम की एक छात्रा ने अपनी एमफिल शोध उपाधि प्राप्त की है। डॉ. रमण को शोध केंद्र का सह समन्‍वयक बनाए जाने पर विश्‍वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों में खुशी की लहर है।



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By  Public Reporter
posted : Tue/Feb 02, 2021, 10:08 AM - IST

Mothīhāri / महात्मा गांधी... / महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया विभाग के अंतर्गत आचार्य भरत मुनि संचार शोध केंद्र के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि अपने आशीर्वचन देते अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि भारत के इतिहास में भरत की परंपरा बहुत आदरणीय रही है। चाहे संचार दर्शन के प्रणेता भरतमुनि हों या दुष्यंत के पुत्र भरत, चाहे भगवान राम के अनुज भरत हों या सन्यास परंपरा के भर्तृहरि, सबने इतिहास में अमिट छाप छोड़ी है। नाट्यशास्त्र के प्रणेता भरतमुनि इस मामले में विशिष्ट हैं कि उन्होंने अभिव्यक्ति के विभिन्न भावों को जनसामान्य तक पहुंचाने का विशिष्ट सिद्धांत दिया। भारत की आध्यात्मिक औऱ सांस्कृतिक उन्नति में इन सिद्धांतों की महती भूमिका रही है। आधुनिक संचार प्रणाली भी नाट्यशास्त्र के सिद्धांतों की उपेक्षा नहीं कर सकती, उसे अभी वहां तक पहुंचना है जहां तक नाट्यशास्त्र की पहुंच काफी पहले से है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह शोध केंद्र संचार के नए सिद्धांतों के साथ भारतीय परंपरा के अनछुए पहलुओं को दुनिया के सामने लाने में सफल होगा। मुख्य वक्ता प्रो.ओमप्रकाश सिंह ने कहा है कि भरतमुनि न केवल भारतीय बल्कि आदिम संचार सिद्धांत के जनक हैं। उनकी प्रसिद्ध कृति नाट्यशास्त्र का उल्लेख आदिकवि वाल्मीकि की रामायण और महर्षि व्यास रचित महाभारत में भी है। इस ग्रंथ में मानवीय संचार प्रणाली के इतने तौर-तरीकों का वर्णन है कि पाश्चात्य संचार के सिद्धांत इनके आगे कुछ भी नहीं हैं।  कार्यक्रम का आयोजन विवि के जिला स्कूल स्थित चाणक्य परिसर के राजकुमार शुक्ल सभागार में किया गया था। कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते प्रो. सिंह ने कहा कि पाश्चात्य विद्वानों में हर बात को ईशा के सौ डेढ़ सौ साल आगे पीछे का बताने की परंपरा रही है जबकि भरतंमुनि का नाट्यशास्त्र अत्यंत प्राचीन और संचार के सिद्धांतों के मामले में दुनिया का सबसे पहला सिद्धांत है। नृत्य, गीत और संवाद सहित कलाओं और मानवीय संवेदना के इतने पक्ष इसमें परिभाषित किए गए हैं कि इसे  भारतीय मनीषा ने पंचम वेद की मान्यता दी है। उनके नाम पर शोध केंद्र की स्थापना कर विवि के मीडिया विभाग ने बड़ा काम किया है। इसके लिए विवि के कुलपति सहित पूरा प्रशासन बधाई का पात्र है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महात्मा गांधी केंद्रीय विवि के प्रतिकुलपति प्रो.जी. गोपाल रेड्डी ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विवि ने पांच साल की छोटी अवधि में ही ग्यारह विभिन्न शोधकेंद्रों की स्थापना कर विशिष्ट क्षेत्र में शोध की महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि तैयार की है। उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि हम अपने अतीत के अनछुए पहलुओं को विश्व पटल पर मजबूती से रखें और इसमें शोध केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि कुलपति प्रो.संजीव कुमार शर्मा के नेतृत्व में विवि नित नए आयाम स्थापित कर रहा है। इससे पहले आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष सह शोध केंद्र के अध्यक्ष डा.प्रशांत कुमार ने कहा कि महाभारत कालीन समाज में तकनीक के हर क्षेत्र में हम आगे थे लेकिन कालांतर में हम अपनी उपलब्धियों की ओर से विमुख हो गए या कर दिए गए। इस शोध केंद्र के माध्यम से भारतीय प्राचीन परंपराओं का अध्ययन करने का शोधकर्ताओं को अवसर मिलेगा। शोध केंद्र के गठन की अनुमति के लिए उन्होंने कुलपति का आभार व्यक्त किया। समन्वयक डॉ.अंजनी कुमार झा ने अपने संचालन सह स्वागत में विवि के कुलपति, प्रतिकुलपति समेत अन्य पदाधिकारियों सहित मीडिया अध्ययन विभाग के सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों से शोध केंद्र के संचालन में सहयोग करने का आग्रह किया। सह समन्वयक डॉ.साकेत रमण ने शोध केंद्र की स्थापना की पृष्ठभूमि की चर्चा करते इसमें कुलपति व विभागाध्यक्ष के योगदान की सराहना की। डॉ. रमण ने बताया कि शोध केंद्र के अन्तर्गत दो शोधार्थियों को संबद्ध विषयों पर पीएचडी कराया जाएगा एवं लघु शोध कार्य हेतु फेलोशिप प्रदान करने की भी योजना है।  इस अवसर पर विवि के विभिन्न विभागों के डीन, विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापक जिसमें डीएसडब्ल्यू प्रो.आनंद प्रकाश, डीन एवं वित्त अधिकारी प्रो. विकास पारीक, परीक्षा नियंत्रक केके उपाध्याय, प्रो.अजय कुमार गुप्ता, प्रो. प्रणवीर सिंह, प्रो. अन्तरत्रण पाल मीडिया अध्ययन विभाग के शिक्षक डॉ. परमात्मा कुमार मिश्र, डॉ. सुनील दीपक घोडके, डॉ. उमा यादव सहित मीडिया अध्ययन के तमाम शोधार्थी व विद्यार्थी मौजूद थे। साथ ही वर्चुअल प्लेटफार्म पर भी गूगल मीट के जरिए सैकड़ों लोग इस आयोजन से जुड़े।



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By  Public Reporter
posted : Fri/Jan 22, 2021, 04:02 AM - IST

विश्‍वभर में कोरोना... / भारत ने सहायता अनुदान और पड़ोसी प्रथम नीति के तहत भूटान और मालदीव के बाद अब नेपाल और बांग्लादेश को वैक्सीन दी है। भारत ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के कोविशील्ड टीके के 10 लाख डोज नेपाल की राजधानी काठमांडू और बांग्‍लादेश की राजधानी ढाका को 20 लाख डोज गुरुवार को पहुंचाए हैं। भूटान और मालदीव को बुधवार को भारत ने वैक्सीन की पहली खेप पहुंचाई थी। इसके साथ ही भारत दुनिया का वैक्सीन हब के रूप में सामने आ रहा है। अब तक 92 देशों ने भारत से वैक्सीन के लिए संपर्क किया है।



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posted : Wed/Jan 06, 2021, 12:48 PM - IST

Pūnch / जम्मू-कश्मीर पुलिस... / श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास से हथियारों की खेप पकड़ी गई है। पुंछ जिले के मेंढर इलाके में पिछले दिनों पकड़े गए आतंकियों के तीन सहयोगियों की निशानदेही पर हथियरों की की तीसरी खेप का पता चला था। प्रशासन के अनुसार आतंकी इन हथियारों से क्षेत्र के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर सांप्रदायिक दंगा भड़काने के साजिश रच रहे थे। सुरक्षा बलों ने कुलगाम में लश्कर-ए-तैयबा के एक मददगार को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी के खिलाफ यारीपोरा थाने में केस दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। इन तीनों से पूछताछ करने के बाद पुलिस टीम और सेना की मदद से डब्बी गांव में तलाशी अभियान चलाया। पुंछ के एसएसपी रमेश अंग्राल ने बताया कि रविवार सुबह बालाकोट में एलओसी के निकट स्थित डब्बी गांव में तलाशी के दौरान एक पिस्तौल, तीन मैगजीन, 35 गोलियां और पांच हथगोले बरामद किए गए हैं। उन्‍होंने बताया कि 28 दिसंबर को बालाकोट क्षेत्र से आतंकियों के तीन मददगारों- गलुटा निवासी मुस्तफा खान आरै डब्बी गांव के मोहम्मद यासिन और रईस अहमद को पकड़ा था। एसएसपी ने कहा कि पकड़े गए आतंकियों के मददगारों की निशानदेही पर हथियारों की यह तीसरी बड़ी बरामदगी है। जांच अभियान अभी जारी है।



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posted : Tue/Jan 05, 2021, 01:05 AM - IST

Wardha / कोविड-19 के खिलाफ... / भारत में डीसीजीआई ने कोविड-19 वैक्‍सीन के सीमित आपातकालीन उपयोग की स्‍वीकृति दे दी है। अब आपातकालीन स्थिति में किसी भी संक्रमित व्‍यक्ति को कोविड-19 वैक्‍सीन दिया जा सकता है। टीकाकरण स्‍थलों पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के लिए लगभग 1,14,100 टीका लगाने वालों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। देश में तीसरे चरण का परीक्षण 25,800 लोगों के साथ शुरू किया गया था और लगभग 22,500 प्रतिभागियों को देश भर में टीका लगाया गया। अब तक प्राप्‍त आंकड़ों के अनुसार वैक्‍सीन सुरक्षित पाया गया है। भारत ने बड़े पैमाने पर देश व्‍यापी कोविड-19 वैक्‍सीन रोल आउट किया देश के सभी राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों के 125 जिलों में 286 सत्रों में कोविड-19 वैक्‍सीन देने का पूर्वाभ्‍यास किया गया। प्रत्‍येक जिले में तीन या तीन से ज्‍यादा बार पूर्वाभ्‍यास किया गया जिसमें निजी अस्‍पताल, सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं, ग्रामीण एवं शहरी आउटरीच स्‍थानों पर कोरोना वैक्‍सीन का पूर्वाभ्‍यास किया गया। जिला कलेक्‍टरों के देखरेख में यह पूर्वाभ्‍यास राज्‍य जिला, ब्‍लॉक और अस्‍पताल स्‍तर के अधिकारियों को कोविड-19 रोल-आउट के सभी पहलुओं से अवगत कराने के लिए भी संचालित किया गया। इसका उद्देश्‍य ब्‍लॉक, जिला और राज्‍य स्‍तर पर नियोजन क्रियान्‍वयन और रिर्पोटिंग के लिए परिचालन का आकलन करना था।



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posted : Tue/Jan 05, 2021, 01:05 AM - IST

Wardha / कोविड-19 के खिलाफ... / भारत में डीसीजीआई ने कोविड-19 वैक्‍सीन के सीमित आपातकालीन उपयोग की स्‍वीकृति दे दी है। अब आपातकालीन स्थिति में किसी भी संक्रमित व्‍यक्ति को कोविड-19 वैक्‍सीन दिया जा सकता है। टीकाकरण स्‍थलों पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के लिए लगभग 1,14,100 टीका लगाने वालों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। देश में तीसरे चरण का परीक्षण 25,800 लोगों के साथ शुरू किया गया था और लगभग 22,500 प्रतिभागियों को देश भर में टीका लगाया गया। अब तक प्राप्‍त आंकड़ों के अनुसार वैक्‍सीन सुरक्षित पाया गया है। भारत ने बड़े पैमाने पर देश व्‍यापी कोविड-19 वैक्‍सीन रोल आउट किया देश के सभी राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों के 125 जिलों में 286 सत्रों में कोविड-19 वैक्‍सीन देने का पूर्वाभ्‍यास किया गया। प्रत्‍येक जिले में तीन या तीन से ज्‍यादा बार पूर्वाभ्‍यास किया गया जिसमें निजी अस्‍पताल, सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं, ग्रामीण एवं शहरी आउटरीच स्‍थानों पर कोरोना वैक्‍सीन का पूर्वाभ्‍यास किया गया। जिला कलेक्‍टरों के देखरेख में यह पूर्वाभ्‍यास राज्‍य जिला, ब्‍लॉक और अस्‍पताल स्‍तर के अधिकारियों को कोविड-19 रोल-आउट के सभी पहलुओं से अवगत कराने के लिए भी संचालित किया गया। इसका उद्देश्‍य ब्‍लॉक, जिला और राज्‍य स्‍तर पर नियोजन क्रियान्‍वयन और रिर्पोटिंग के लिए परिचालन का आकलन करना था।



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posted : Wed/Jan 06, 2021, 12:48 PM - IST

Pūnch / जम्मू-कश्मीर पुलिस... / श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास से हथियारों की खेप पकड़ी गई है। पुंछ जिले के मेंढर इलाके में पिछले दिनों पकड़े गए आतंकियों के तीन सहयोगियों की निशानदेही पर हथियरों की की तीसरी खेप का पता चला था। प्रशासन के अनुसार आतंकी इन हथियारों से क्षेत्र के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर सांप्रदायिक दंगा भड़काने के साजिश रच रहे थे। सुरक्षा बलों ने कुलगाम में लश्कर-ए-तैयबा के एक मददगार को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी के खिलाफ यारीपोरा थाने में केस दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। इन तीनों से पूछताछ करने के बाद पुलिस टीम और सेना की मदद से डब्बी गांव में तलाशी अभियान चलाया। पुंछ के एसएसपी रमेश अंग्राल ने बताया कि रविवार सुबह बालाकोट में एलओसी के निकट स्थित डब्बी गांव में तलाशी के दौरान एक पिस्तौल, तीन मैगजीन, 35 गोलियां और पांच हथगोले बरामद किए गए हैं। उन्‍होंने बताया कि 28 दिसंबर को बालाकोट क्षेत्र से आतंकियों के तीन मददगारों- गलुटा निवासी मुस्तफा खान आरै डब्बी गांव के मोहम्मद यासिन और रईस अहमद को पकड़ा था। एसएसपी ने कहा कि पकड़े गए आतंकियों के मददगारों की निशानदेही पर हथियारों की यह तीसरी बड़ी बरामदगी है। जांच अभियान अभी जारी है।



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posted : Fri/Jan 22, 2021, 04:02 AM - IST

विश्‍वभर में कोरोना... / भारत ने सहायता अनुदान और पड़ोसी प्रथम नीति के तहत भूटान और मालदीव के बाद अब नेपाल और बांग्लादेश को वैक्सीन दी है। भारत ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के कोविशील्ड टीके के 10 लाख डोज नेपाल की राजधानी काठमांडू और बांग्‍लादेश की राजधानी ढाका को 20 लाख डोज गुरुवार को पहुंचाए हैं। भूटान और मालदीव को बुधवार को भारत ने वैक्सीन की पहली खेप पहुंचाई थी। इसके साथ ही भारत दुनिया का वैक्सीन हब के रूप में सामने आ रहा है। अब तक 92 देशों ने भारत से वैक्सीन के लिए संपर्क किया है।



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posted : Tue/Feb 02, 2021, 10:08 AM - IST

Mothīhāri / महात्मा गांधी... / महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया विभाग के अंतर्गत आचार्य भरत मुनि संचार शोध केंद्र के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि अपने आशीर्वचन देते अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि भारत के इतिहास में भरत की परंपरा बहुत आदरणीय रही है। चाहे संचार दर्शन के प्रणेता भरतमुनि हों या दुष्यंत के पुत्र भरत, चाहे भगवान राम के अनुज भरत हों या सन्यास परंपरा के भर्तृहरि, सबने इतिहास में अमिट छाप छोड़ी है। नाट्यशास्त्र के प्रणेता भरतमुनि इस मामले में विशिष्ट हैं कि उन्होंने अभिव्यक्ति के विभिन्न भावों को जनसामान्य तक पहुंचाने का विशिष्ट सिद्धांत दिया। भारत की आध्यात्मिक औऱ सांस्कृतिक उन्नति में इन सिद्धांतों की महती भूमिका रही है। आधुनिक संचार प्रणाली भी नाट्यशास्त्र के सिद्धांतों की उपेक्षा नहीं कर सकती, उसे अभी वहां तक पहुंचना है जहां तक नाट्यशास्त्र की पहुंच काफी पहले से है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह शोध केंद्र संचार के नए सिद्धांतों के साथ भारतीय परंपरा के अनछुए पहलुओं को दुनिया के सामने लाने में सफल होगा। मुख्य वक्ता प्रो.ओमप्रकाश सिंह ने कहा है कि भरतमुनि न केवल भारतीय बल्कि आदिम संचार सिद्धांत के जनक हैं। उनकी प्रसिद्ध कृति नाट्यशास्त्र का उल्लेख आदिकवि वाल्मीकि की रामायण और महर्षि व्यास रचित महाभारत में भी है। इस ग्रंथ में मानवीय संचार प्रणाली के इतने तौर-तरीकों का वर्णन है कि पाश्चात्य संचार के सिद्धांत इनके आगे कुछ भी नहीं हैं।  कार्यक्रम का आयोजन विवि के जिला स्कूल स्थित चाणक्य परिसर के राजकुमार शुक्ल सभागार में किया गया था। कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते प्रो. सिंह ने कहा कि पाश्चात्य विद्वानों में हर बात को ईशा के सौ डेढ़ सौ साल आगे पीछे का बताने की परंपरा रही है जबकि भरतंमुनि का नाट्यशास्त्र अत्यंत प्राचीन और संचार के सिद्धांतों के मामले में दुनिया का सबसे पहला सिद्धांत है। नृत्य, गीत और संवाद सहित कलाओं और मानवीय संवेदना के इतने पक्ष इसमें परिभाषित किए गए हैं कि इसे  भारतीय मनीषा ने पंचम वेद की मान्यता दी है। उनके नाम पर शोध केंद्र की स्थापना कर विवि के मीडिया विभाग ने बड़ा काम किया है। इसके लिए विवि के कुलपति सहित पूरा प्रशासन बधाई का पात्र है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महात्मा गांधी केंद्रीय विवि के प्रतिकुलपति प्रो.जी. गोपाल रेड्डी ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विवि ने पांच साल की छोटी अवधि में ही ग्यारह विभिन्न शोधकेंद्रों की स्थापना कर विशिष्ट क्षेत्र में शोध की महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि तैयार की है। उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि हम अपने अतीत के अनछुए पहलुओं को विश्व पटल पर मजबूती से रखें और इसमें शोध केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि कुलपति प्रो.संजीव कुमार शर्मा के नेतृत्व में विवि नित नए आयाम स्थापित कर रहा है। इससे पहले आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष सह शोध केंद्र के अध्यक्ष डा.प्रशांत कुमार ने कहा कि महाभारत कालीन समाज में तकनीक के हर क्षेत्र में हम आगे थे लेकिन कालांतर में हम अपनी उपलब्धियों की ओर से विमुख हो गए या कर दिए गए। इस शोध केंद्र के माध्यम से भारतीय प्राचीन परंपराओं का अध्ययन करने का शोधकर्ताओं को अवसर मिलेगा। शोध केंद्र के गठन की अनुमति के लिए उन्होंने कुलपति का आभार व्यक्त किया। समन्वयक डॉ.अंजनी कुमार झा ने अपने संचालन सह स्वागत में विवि के कुलपति, प्रतिकुलपति समेत अन्य पदाधिकारियों सहित मीडिया अध्ययन विभाग के सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों से शोध केंद्र के संचालन में सहयोग करने का आग्रह किया। सह समन्वयक डॉ.साकेत रमण ने शोध केंद्र की स्थापना की पृष्ठभूमि की चर्चा करते इसमें कुलपति व विभागाध्यक्ष के योगदान की सराहना की। डॉ. रमण ने बताया कि शोध केंद्र के अन्तर्गत दो शोधार्थियों को संबद्ध विषयों पर पीएचडी कराया जाएगा एवं लघु शोध कार्य हेतु फेलोशिप प्रदान करने की भी योजना है।  इस अवसर पर विवि के विभिन्न विभागों के डीन, विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापक जिसमें डीएसडब्ल्यू प्रो.आनंद प्रकाश, डीन एवं वित्त अधिकारी प्रो. विकास पारीक, परीक्षा नियंत्रक केके उपाध्याय, प्रो.अजय कुमार गुप्ता, प्रो. प्रणवीर सिंह, प्रो. अन्तरत्रण पाल मीडिया अध्ययन विभाग के शिक्षक डॉ. परमात्मा कुमार मिश्र, डॉ. सुनील दीपक घोडके, डॉ. उमा यादव सहित मीडिया अध्ययन के तमाम शोधार्थी व विद्यार्थी मौजूद थे। साथ ही वर्चुअल प्लेटफार्म पर भी गूगल मीट के जरिए सैकड़ों लोग इस आयोजन से जुड़े।



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posted : Wed/Feb 03, 2021, 02:16 AM - IST

Mothīhāri / महात्मा गांधी... / महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के नव गठित आचार्य भरत मुनि संचार शोध केंद्र में मीडिया अध्ययन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. साकेत रमण को सह समन्वयक बनाया गया है। विश्वविद्यालय के ओएसडी डॉ. पदमाकर मिश्रा द्वारा इस बाबत पत्र जारी किया गया है। कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि अभी तक विश्वविद्यालय में कुल 11 शोध केंद्र स्थापित किए गए हैं और आचार्य भरत मुनि के नाम पर स्थापित केंद्र स्वयं ही अपनी विशिष्टता सिद्ध करेगा। कुलपति ने शोध केंद्र के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार समेत समन्वयक व सह समन्वयक को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। यह शोध केंद्र मीडिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार के मार्गदर्शन में कार्य करेगा। भारतीय प्राचीन संचार व्यवस्था के संवर्धन को लेकर इस शोध केंद्र की रूपरेखा एवं प्रस्ताव डॉ. रमण ने दिया था। डॉ. रमण ने बताया कि शोध केंद्र द्वारा दो शोधार्थियों को पीएचडी कराया जाएगा व भारतीय प्राचीन संचार संबंधी लघु शोध कार्य के लिए फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी। साथ ही केंद्र विविध फंडिंग एजेंसीज से प्राप्त प्रोजेक्ट पर भी शीघ्र ही कार्य प्रारंभ करेगा। इसका प्रस्ताव तैयार किया का रहा है। शोध केंद्र ईस्टर्न कम्युनिकेशन फिलॉस्फी पर रिसर्च जर्नल भी प्रकाशित करने की योजना पर कार्य कर रहा है। वरिष्ठ संचार शास्त्री डॉ. रमण मुजफ्फरपुर जिले के निवासी हैं। भारतीय प्राचीन संचार पर उनकी पुस्तक भारतीय संचार दर्शन एक नई दृष्टि 2016 में प्रकाशित हो चुकी है। इस विषय पर डॉ. रमण के करीब 10 शोध पत्र राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित हो चुके हैं। वर्ष 2020 में डॉ. रमण के निर्देशन में कठोपनिषद के संचार सिद्धांत पर असम की एक छात्रा ने अपनी एमफिल शोध उपाधि प्राप्त की है। डॉ. रमण को शोध केंद्र का सह समन्‍वयक बनाए जाने पर विश्‍वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों में खुशी की लहर है।



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posted : Wed/Feb 03, 2021, 04:28 AM - IST

Samba / जम्मू केन्द्रीय... / नेपाल गणराज्य की प्रतिष्ठित एजेंसी NCHDC  द्वारा अकादमिक लेखन के लिए दिए जाने वाला वार्षिक सम्मान Academic Excellence Award 2020 की घोषणा हुई। 13 सितंबर 2020 को काठमांडू में आयोजित सम्मान समारोह में कोविड-19 की वजह से डॉ बाबू शामिल नहीं हो सकें। संस्था ने Certificate of Appreciation का अवार्ड डाक सेवा से उनके पते पर भेज दिया। ज्ञात हो कि यह सम्मान मुख्यतः उच्च शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, प्रवासन, संस्कृति जैसे विषयों पर मौलिक एवं शोध लेखन के लिय दिए जाते हैं। डॉ. बच्चा बाबू  वर्तमान में जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया स्टडीज़ विभाग में वरिष्ठ सहायक प्रोफ़ेसर पद पर कार्यरत हैं। साथ ही विश्वविद्यालय की कई अन्य प्रशासनिक ज़िम्मेदारी जैसे प्रभारी कुलानुशासक, निदेशक सेंटर फ़ॉर योग एवं मीडिया अधिकारी का दायित्‍व भी संभाल रहे हैं। इन्‍होंने जम्मू कश्मीर से जुड़े कई विषयों पर मेजर एवं माइनर प्रोजेक्ट भी किया है। डॉ. बाबू को अकादमिक एक्सिलेंस अवार्ड 2020 मिलने पर विश्‍वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों में खुशी की लहर है।



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posted : Wed/Feb 10, 2021, 10:17 AM - IST

Wardha / हिंदी विवि के मुख्य... / महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ के डीन एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्‍यक्ष प्रोफेसर कृपाशंकर चौबे को विश्‍वविद्यालय का मुख्‍य राजभाषा अधिकारी बनाया गया है। साथ ही वे विश्‍वविद्यालय में कई अन्‍य विभागों के प्रभारी अध्‍यक्ष एवं कई बड़े दायित्‍वों का निर्वहन भी कर रहे हैं। प्रोफेसर चौबे इससे पूर्व लंबे समय तक जनसत्‍ता जैसे प्रतिष्ठित समाचारपत्र में अपनी सेवाएं दी हैं। देश के राष्‍ट्रीय एवं अंतरराष्‍टीय समाचरपत्रों में एक खास विचारधारा के लिए लेखन का कार्य करते रहते हैं। प्रोफेसर चौबे समाजसेवी महाश्‍वेता देवी के दत्‍तक पुत्र के रूप में भी जाने जाते हैं। भारत की पूर्व रेल मंत्री ममता बनर्जी के समय में रेल मंत्रालय में हिंदी सलाहकार समिति के सदस्‍य के रूप में भी प्रोफेसर चौबे अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इनकी महत्‍वपूर्ण रचनाओं में महाश्‍वेता देवी का जीवन और साहित्‍य, महाअरण्य की माँ, मृणाल सेन का छायालोक, करुणामूर्ति मदर टेरेसा और नजरबंद तसलीमा प्रमुख कृतियां हैं।



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posted : Mon/Apr 12, 2021, 11:16 AM - IST

New Delhi / Vaccination Becomes... / दिल्ली/ भारत दुनिया में सबसे तेज टिकाकरण करने वाले देशों की सूची में अमेरिका को पछाड़ कर शीर्ष पर आ गया है। कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान के 85वें शनिवार को भारत ने यह मुकाम हासिल किया।इतने टिकाकरण करने में अमेरिका को 89 और चीन को 102 दिन लगे थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश मे हररोज लगाए जाने वाले टीकों के मामले में भी भारत शीर्ष पर बना हुआ है। भारत मे प्रतिदिन 38,93,288 टीके लगाए जा रहे है। वहीं दूसरे नंबर पर अमेरिका जहां वैक्सिन की रोजाना औसतन 30 करोड़ डोज दी जा रही है। मंत्रालय ने बताया कि अमेरिका में 85वें दिनो में 9.2 लोगो को कोरोना का टीका लगाया गया। जबकि इतने ही दिनों में चीन ने 6.14 करोड़ और ब्रिटेन में 2.13 करोड़ वैक्सीन की डोज लाभार्थियों को थी गई थी। भारत में हो रहा सबसे तेज टिकाकरण पंतप्रधान कार्यक्रम ने एक चार्ट ट्वीट किया। भारत को सबसे तेज गति से 10 करोड़ टिका लगाने वाले देश के रूप में दिखाई गया है। साथ ही कहा गया कि यह भारत को स्वस्थ और कोरोना मुक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को मजबूत कर रहा है। पीएम मोदी ने कि टिका महोत्सव मनाने की अपील बीते दिनों पंतप्रधान नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियो के साथ बैठक में देशवासियों 11-14 अप्रेल के बीच मे टिका उत्सव मनाने की अपील की है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 11 अप्रेल को महात्मा ज्योतिबा फुले जी के जन्मजयंती पर और 14 अप्रेल को डॉ बाबा साहेब की जयंती पर इस बीच सभी टिका उत्सव मनाये। पीएम मोदी ने कहा था कि हमारी कोशिश होनी चाहिए इस टिका उत्सव में हम ज़्यादा से ज़्यादा लोगो का टिकाकरण किया जा सके।



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posted : Fri/Jun 18, 2021, 10:23 AM - IST

New Delhi / माइक्रोसॉफ्ट के... / नई दिल्ली / माइक्रोसॉफ्ट ने अपने भारतवंशी सीईओ सत्य नडेला को कंपनी का अध्यक्ष बनाया है, जिस अतिरिक्त भूमिका में वह ''बोर्ड का एजेंडा निर्धारित करने में अगुवाई करेंगे। माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प ने बुधवार को घोषणा की कि बोर्ड के स्वतंत्र निदेशकों ने सर्वसम्मति से नडेला को बोर्ड के अध्यक्ष की भूमिका के लिए चुना।  कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘‘इस भूमिका में, नडेला बोर्ड के लिए एजेंडा तय करने के काम का नेतृत्व करेंगे, सही रणनीतिक अवसरों का लाभ लेने और मुख्य जोखिमों की पहचान करने तथा उनके असर को कम करने के लिए कारोबार की अपनी गहरी समझ का लाभ उठाएंगे।'' नडेला (53), थॉम्पसन की जगह लेंगे, जो मुख्य स्वतंत्र निदेशक के रूप में आगे अपनी भूमिका निभाएंगे। नडेला 2014 में स्टीव बाल्मर के बाद माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ बने थे। सत्या नडेला का जन्म भारत के हैदराबाद में साल 1967 में हुआ था। उनके पिता एक प्रशासनिक अधिकारी और मां संस्कृत की लेक्चरर थीं। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा हैदराबाद पब्लिक स्कूल से करने के बाद साल 1988 में मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। इसके बाद वे कंप्यूटर साइंस में परास्नातक करने के लिए अमेरिका चले गए। उन्होंने 1996 में शिकागो के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया। 53 साल के नडेला को 2014 में माइक्रोसॉफ्ट का सीईओ बनाया गया था। जब उन्होंने यह पद संभाला था तो कंपनी कई तरह की परेशानियों से गुजर रही थी। नडेला ने न सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट को इन परेशानियों से बाहर निकाला बल्कि उसे नई बुलंदियों तक पहुंचाया। उन्होंने क्लाउड कंप्यूटिंग, मोबाइल ऐप्लिकेशनंस और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर फोकस किया और साथ ही ऑफिस सॉफ्टवेयर फ्रेंजाईजी में भी नई जान फूंकी। उनके कार्यकाल के दौरान माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों की कीमत में सात गुना से अधिक इजाफा हुआ और कंपनी का मार्केट कैप 2 लाख करोड़ डॉलर के करीब पहुंच गया। नडेला कंपनी के तीसरे सीईओ हैं और कंपनी के इतिहास में तीसरे चेयरमैन होंगे। इससे पहले बिल गेट्स और थॉमसन कंपनी के चेयरमैन रह चुके हैं। नडेला से पहले स्टीव बाल्मर कंपनी के सीईओ रहे। कंपनी ने एक बयान में कहा कि 72 साल के थॉमसन लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर एक्टिव रहेंगे और नडेला के कंपनसेशन, सक्सेशन प्लानिंग, गवर्नेंस और बोर्ड ऑपरेशंस देखेंगे। कंपनी ने हाल में ही प्रति शेयर 56 सेंट का तिमाही लाभांश देने का निर्णय लिया है.



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